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पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे रूट विवाद: समस्तीपुर में लोगों का विरोध, घर-दुकान और कॉलेज पर संकट के आरोप

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पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के अलाइनमेंट को लेकर समस्तीपुर में विवाद बढ़ गया है। ग्रामीणों ने रूट बदलाव का आरोप लगाया है, जबकि जांच का भरोसा दिया गया है।

समस्तीपुर/आलम की खबर:बिहार के महत्वाकांक्षी पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर समस्तीपुर जिले में विवाद गहराता जा रहा है। सरायरंजन प्रखंड क्षेत्र के कई ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एक्सप्रेसवे के प्रस्तावित मार्ग में बदलाव किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में घर, दुकानें और एक पुराने कॉलेज का हिस्सा प्रभावित होने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि शुरुआती सर्वे के दौरान एक्सप्रेसवे का मार्ग कम आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरने वाला था, जिससे विस्थापन की संभावना कम थी। लेकिन बाद में मार्ग में बदलाव होने से घनी आबादी वाले इलाकों पर इसका असर पड़ सकता है। लोगों का दावा है कि नए अलाइनमेंट के कारण सरायरंजन बाजार, कंकालीपुर और झाखड़ा सहित कई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हो सकते हैं।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा झाखड़ा स्थित केदार संत रामाश्रय कॉलेज को लेकर सामने आया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, करीब छह दशक पुराने इस शिक्षण संस्थान का हिस्सा एक्सप्रेसवे की जद में आ सकता है। कॉलेज में हजारों छात्र पढ़ाई करते हैं और ग्रामीणों का कहना है कि यदि भवन प्रभावित होता है तो छात्रों और क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पहले तय किए गए मार्ग की जगह नए मार्ग को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि इस मामले में लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित पक्षों ने अपना पक्ष भी रखा है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने किसी भी प्रकार के दबाव या हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा है कि एक्सप्रेसवे का मार्ग तय करना संबंधित तकनीकी संस्थाओं का विषय है। वहीं जिन लोगों पर जमीन से जुड़े आरोप लगाए जा रहे हैं, उन्होंने भी आरोपों को गलत बताया है।

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा है कि परियोजना महत्वपूर्ण है, लेकिन लोगों की चिंताओं को भी गंभीरता से देखा जाएगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि विकास कार्यों के साथ प्रभावित लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाए।

वहीं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों ने भी पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अधिकारियों का कहना है कि एक्सप्रेसवे का अलाइनमेंट तकनीकी जांच, जमीन की स्थिति और अन्य मानकों के आधार पर तय किया जाता है। यदि किसी बदलाव की बात सामने आती है तो उसकी जांच जरूरी होगी।

पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार की बड़ी सड़क परियोजनाओं में शामिल है। करीब 245 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सप्रेसवे के निर्माण से पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। यह परियोजना कई जिलों से होकर गुजरेगी और इसके पूरा होने के बाद राज्य में परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास परियोजना के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उनका विरोध इस बात को लेकर है कि रूट ऐसा होना चाहिए जिससे कम से कम लोगों को नुकसान पहुंचे। ग्रामीणों ने मांग की है कि पुराने और नए दोनों अलाइनमेंट की निष्पक्ष जांच कराई जाए और प्रभावित परिवारों तथा संस्थानों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय लिया जाए।

इस बीच भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। प्रशासनिक स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और जमीन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में सरकार और एनएचएआई की रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे: विकास की रफ्तार और जनता के भरोसे के बीच संतुलन जरूरी

पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बिहार के विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक परियोजना मानी जा रही है। बेहतर सड़क नेटवर्क किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति की रीढ़ होता है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से न केवल पटना और पूर्णिया के बीच यात्रा का समय कम होगा, बल्कि व्यापार, उद्योग, रोजगार और पर्यटन को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट बिहार की तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं और आने वाले वर्षों में राज्य के विकास का नया रास्ता खोल सकते हैं।

लेकिन किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल निर्माण कार्य पूरा करने से तय नहीं होती, बल्कि यह भी जरूरी होता है कि उससे प्रभावित होने वाले लोगों की समस्याओं को कितनी संवेदनशीलता से सुना और हल किया जाता है। समस्तीपुर में एक्सप्रेसवे के रूट को लेकर उठे सवाल इसी बात की ओर इशारा करते हैं कि विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि अलाइनमेंट में बदलाव के कारण कई घर, दुकानें और वर्षों पुराने शिक्षण संस्थान प्रभावित हो सकते हैं। वहीं सरकार और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखें। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे लोगों का भरोसा मजबूत होता है।

अगर तकनीकी कारणों से रूट में बदलाव जरूरी है तो उसकी स्पष्ट जानकारी लोगों को दी जानी चाहिए। वहीं यदि किसी क्षेत्र में अनावश्यक नुकसान की संभावना है तो विकल्पों पर भी विचार होना चाहिए। विकास का उद्देश्य लोगों की सुविधा बढ़ाना है, न कि लोगों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा करना।

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य से जुड़ा सपना है। इसलिए जरूरी है कि इसका निर्माण तेजी से हो, लेकिन साथ ही प्रभावित परिवारों, किसानों, व्यापारियों और शैक्षणिक संस्थानों के हितों की रक्षा भी की जाए। सरकार, प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर संवाद से ही इस परियोजना को सफल बनाया जा सकता है।

आने वाले समय में इस विवाद का समाधान किस तरह होता है, यह महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है और सभी पक्षों की बात सुनी जाती है तो यह परियोजना विकास और जनभागीदारी का बेहतर उदाहरण बन सकती है। बिहार को तेज विकास की जरूरत है, लेकिन यह विकास विश्वास, पारदर्शिता और जनता के हितों के साथ आगे बढ़े, यही सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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